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पुत्र प्राप्ति के सरल उपाय —-PUTRA PRAPTI KE UPAY

 अपना वंश बढ़ाने के लिए पुत्र की आवश्यकता होती है। इसी चाहत में लोग कई बच्चे पैदा कर लेते हैं। उन लोगों का मानना यह है कि 3 बच्चों के बाद मां की कोख बदल जाती है और 3 बच्चों के बाद पुत्र की प्राप्ति होती है। और माना जाता हैं कि 3 बच्चों के बाद चौथा पुत्र होगा।  वैसे अब ये सोच धीरे धीरे बदलती जा रही है खासकर पढ़े लिखे लोग और बड़े शहरो में रहने वाले अब पुत्र-पुत्री में भेद नहीं करते। आज हम आपको बताने जा रहे हैं लड़का पैदा करने के उपाय। इन उपाय को करने में कोई बुराई नहीं है।

तो आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।

पुत्र पैदा करने के लिए स्री और पुरुष को लगभग 6 महीने पहले ही तैयारी करनी पड़ती है। पति को दूध से बनी हुई चीजें जैसे पनीर, दूध, मक्खन, मावा, रबड़ी आदि का सेवन करना चाहिए।
गर्भाधान ऋतुकाल की आठवीं, दसवी और बारहवीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक ऋतुस्राव शुरू हो उस दिन व रात को प्रथम मानकर गिनती करना चाहिए। छठी, आठवीं आदि सम रात्रियाँ पुत्र उत्पत्ति के लिए और सातवीं, नौवीं आदि विषम रात्रियाँ पुत्री की उत्पत्ति के लिए होती हैं। इस संबंध में ध्यान रखें कि इन रात्रियों के समय शुक्ल पक्ष यानी चांदनी रात वाला पखवाड़ा भी हो, यह अनिवार्य है, यानी कृष्ण पक्ष की रातें हों।
* सूरजमुखी के बीज खाने से भी पुत्र प्राप्ति की जा सकती है। इसके बीज में विटामिन E काफी मात्रा में पाया जाता है जो स्पर्म काउंट बढाने के साथ लड़का बनाने वाले शुक्राणु बनाता है। इस घरेलु उपाय को करने का तरीका सरल है। आप सूरजमुखी के बीज रोजाना खाना शुरू करे या फिर इन बीजो को बादाम, दही या जामुन के साथ भी खा सकते है।
* लड़का पैदा करने के लिए पुरुष को अपनी पत्नी के साथ संभोग करने से 6 महीने पहले ही खटाई खाना छोड़ देना चाहिए। इस दौरान पति को संभोग करते समय कंडोम आदि का प्रयोग करना चाहिए।
* पुत्र सन्तान योग के लिएCalabash नाम का फल खाना एक असरदार घरेलू उपाय है 50 से 60 ग्राम कच्चा Calabash रोजाना 2-3 महीने तक खाए। जिन्हें इसका स्वाद पसंद नहीं है वो उसमे कुछ मीठा मिलकर खाए।
* अश्वगंधा आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खा है जो पुत्र प्राप्ति की एक असरदार दवा है। इसके लिए 25 ग्राम अश्वगंधा जड़ो का चूरन आधा लीटर पानी में डालकर तब तक उबले जब तक वो 1/4 न रह जाए। उसके बाद उसमे उबला हुआ 100 मिलीलीटर दूध डाले और आधा रहने तक उबाले। इस मिश्रण का 30 मिलीलीटर में आधा चमच्च घी डालकर सुबह के समय 2-3 महीने तक सेवन करे।
यदि आप पुत्र प्राप्त करना चाहते हैं और वह भी गुणवान, तो हम आपकी सुविधा के लिए हम यहाँ माहवारी के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं।
मासिक स्राव के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है।
१- चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
२- पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
३- छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
४- सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
५- आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
६- नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
७- दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
८- ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
९- बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
१०- तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
११- चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
१२- पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।
१३- सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।
सहवास से निवृत्त होते ही पत्नी को दाहिनी करवट से 10-15 मिनट लेटे रहना चाहिए, एमदम से नहीं उठना चाहिए।
कुछ रात े भी है जिसमे हमें सम्भोग करने से बचना चाहिए .. जैसे अष्टमी, एकादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा और अमवाश्या .चन्द्रावती ऋषि का कथन है कि लड़का-लड़की का जन्म गर्भाधान के समय स्त्री-पुरुष के दायां-बायां श्वास क्रिया, पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूर्यस्वर तथा चन्द्रस्वर की स्थिति पर निर्भर करता है।गर्भाधान के समय स्त्री का दाहिना श्वास चले तो पुत्री तथा बायां श्वास चले तो पुत्र होगा।
पुत्र प्राप्ति हेतु क्या करें , प्रमाणित मंत्र |
इसके लिए आप हरिवंश पु राण का पाठ या संतान गोपाल मंत्र का जाप करे
पति-पत्नी दोनों सुबह स्नान कर पूरी पवित्रता के साथ इस मंत्र का जप तुलसी की माला से करें।
1.  &nb sp;    संतान गोपाल मंत्र :-ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ।”  इस मंत्र का बार रोज 108 जाप करे औ र मंत्र जप के बाद भगवान को समर्पित भाव से निरोग, दीर्घजीवी, अच्छे चरित्रवाला, सेहतमंद पुत्र की कामना करें । अपने कमरे में श्री कृष्ण भगवान की बाल रूप की फोटो लगाये या लड्डू गोपाल को रोज माखन मिसरी की भोग अर्पण करे.
2.  &n bsp;    कई बार प्रायः देखने में आया है की विवाह के वर्षो बाद भी गर्भ धारण नहीं हो पाता या बार-बार गर्भपात हो जाता है , ज्योतिष में इस समस्या या दोष का एक प्रमुख कारण पति या पत्नी की कुंडली में संतान दोष अथवा पितृ दोष हो सकता है या घर का वास्तुदोष भी होता है, जिसके कारण गर्भ धारण नहीं हो पाता या बार-बार गर्भपात हो जाता है | इस हेतु पुत्र प्राप्ति का गणपति मंत्र :-
श्री गणपति की मूर्ति पर संतान प्राप्ति की इच्छुक महिला प्रतिदिन स्नानादि से निवृत होकर एक माह तक बिल्ब फल चढ़ाकर इस मंत्र की 11 माला प्रतिदिन जपने से संतान प्राप्ति होती है।

ये उपाय प्राचीन ऋषि महर्षियों ने मानव कल्याण के लिए बताये है, | जिन्हें मै आप लोंगो के सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ
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In the references mentioned, the most influential houses in the natal chart are the fifth, seventh, fourth, eighth, third, tenth and eleventh . The nature and position of the planets in these houses, the effects of the good and bad planets in these houses, and the effects of the beneficial and harmful planets passing into these houses, etc., are the basis of predictions about marriage. and married life .
The location of the lord of the auspic ious and beneficial planets and planets in the fifth or seventh house, and the strong Venus is a clear sign o f a very successful love marriage. Any relationship between the lord of these two planets (through the exchange of related houses) or the mutual aspect between them signifies loving marriage, provided that the auspicious planets co nvert them.
For a harmonious and lasting marriage and maximum marital happiness, the planets like Jupiter, Venus, Moon, Mars, Mercury, etc. they must be auspicious, strong and supportive in the native birth chart.
Delay in marriage or problems in married life are usually due to Mangal Dosh in the birth chart or any Kaal curse yogurt. The location or good influence of any of the auspicious and natural auspicious planets in the seventh house is highly desirable for timely and peaceful marriages and a happy married life.

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