वशीकरण शब्द  का अर्थ होता है – वश में करना | इस वशीकरण मंत्र की साधना करके साधक अभीष्ट प्राणी को अपने वश में कर लेता है | अर्थात जो जिस भी मंत्र की सिद्धि करके साधक प्राणी मात्र को अपने वशीभूत कर ले वह वशीकरण कहलाता है | वास्तव में यह आकर्षण का ही बिकसित और प्रभावी रूप है | आकर्षण के माध्यम से साधक केवल अपनी और खिचता और पास लाता है | जबकि मोहन में उससे कुछ अधिक उक्त प्राणी को विमुग्ध अपनी स्वम की अस्मिता के प्रति विस्मृत सा कर दिया जाता है | इससे मोहित व्यक्ति की चेतना और विवेक मंद हो जाता है | वशीकरण में इन दोषों से भी अधिक प्रभाव रहता है | सम्मोहन का प्रयोग आज भी हिप्टोनिजम के रूप में देखा जाता है | वशीकरण की  प्रतिक्रिया इनसे भी अधिक सशक्त स्थाई और प्रचंड होती है | वशीकृत व्यक्ति को अपने प्रति उचित या अनुचित , हानि या लाभ , और हित या अनहित का विवेक नहीं रहता है | वशीकृत व्यक्ति मानसिक रूप से साधक के अधीन और उसके प्रति पूर्णतया समर्पित हो जाता है | वशीकृत व्यक्ति साधक की इक्षा नुशार साधक के संकेतो एवं उनके आदेशो का पालन करने लगता है | इस मानसिक दासता की स्थिति में वह साधक  के हाथ की कठपुतली बन जाता है |

 

आकर्षण – मंत्र और उनकी सिद्धिया

आकर्षण का अर्थ है – अपनी और खीचना | इसे इस रूप में समझे – कर्ष का मतलब खिचाव – जिसका मतलब होता है खीचना या खीचने की क्रिया करना | सम्मोहन और वशीकरण इससे बहुत भिन्न होता है | अक्सर लोग इस भेद को समझ नहीं पाते है और वशीकरण , सम्मोहन , और आकर्षण को एक सामान ही मान लेते है | इनके उद्देश्य भी बिभिन्न प्रकार के हो सकते है | जैसे – अनुकूल , दासता , भ्रमित और भ्रम ग्रस्त व्यक्ति को साधक आकर्षण मंत्र की सिद्धि के पश्चात इसकी बदौलत जब अपनी और आकृष्ट करता है तब उसे आकर्षण कहते है |

वशीकरण मंत्र :

विधि – जिसे भी वश में करना हो उसकी तस्वीर को किसी एकांत कमरे में लगाकर रात्री मर एक सौ आठ बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए | मंत्र में अमुकश्य की जगह उस व्यक्ति या स्त्री का नाम लेते रहना चाहिए | जिसे भी आप वश में करना चाहते है | उक्त मंत्र लगातार पैतालीस दिनों तक के जाप करने से सिद्ध हो जाता है | जब मंत्र सिद्ध हो जाए तब किसी भी वस्तु को उपरोक्त मंत्र से इक्कीस बार पढ़ कर जिसे वश में करना चाहते हो उसे खिला देना चाहिए | मंत्र – om haan ga joon amukasy , me vasy vasy swaahaa ||

वशीकरण के इस दुसरे मंत्र का जाप भी उपरोक्त विधि से ही किया जाता है | इसमें इक्कीस हजार मंत्र जाप की सिद्धि के बाद मंत्र की सिद्दी प्राप्त होती है | मंत्र को सिद्ध हो जाने के उपरान्त इलायची पर इस मंत्र को ग्यारह बार पढ़ कर फूंक मारना चाहिए | और फिर उस व्यक्ति को खिला देना चाहिए जिसे साधक अपने वश में करना चाहते हो | वह निश्चित ही साधक के वश में हो जाता है | मंत्र – om nam naam neem noom noom ne , naim nam namh aakarshay hrim swaahaa ||

 

किसी भी व्यक्ति से अपने मनमुताबिक कार्य करवाने के लिए इस मंत्र का जाप बहुत ही उपयोगी है | इसके लिए मानता की सिद्धि आवश्यक है | इस मंत्र का जाप भी रात्री के समय किया जाता है | यह मंत्र इक्कीस बार के  हिसाब से नब्बे दिनों तक लगातार जाप करने से मंत्र सिद्ध हो जाता है | इसके बाद इस मंत्र से इक्कीस बार पढ़कर बताशे को मनचाही व्यक्ति या स्त्री को खिला देने से वह साधक के मन के अनुसार कार्य करने लगता है |  मंत्र – om namo chaamunde jay jay vashy many , jay jay saew satwaanamah swahaa ||

पति वशीकरण मंत्र – जब किसी स्त्री का पति उसके अनुकूल ना हो अथवा पराई स्त्रियों  के साथ उसके अवैध सम्बन्ध हो तो स्त्री को इस मंत्र का नित्य इक्कीस बार जाप करना चाहिए | लगातार इक्क्तालिस दिनों तक मंत्र का जाप कर लेने से मंत्र सिद्ध हो जाता है | इसके बाद स्त्री अपने बदन पर जिस भी कपडे को धारण करना चाह रही हो उस कपडे पर इस मंत्र को इक्कीस बार पढ़ कर फूक मारे इसके बाद वही कपड़ा पहनकर अपने पति के के पास जाए तो पति स्त्री को देखते ही वश में हो जाएगा | और कभी भी किसी एनी स्त्री से अवैध सम्बन्ध नहीं बनाएगा | मंत्र – OM ABHITWAA MANUJAATEN DAYAAMI MAM WAASMAA , YATHA SO MAM KEWLO NANYAASAM KIRTIYASHCH CHAA ||

स्त्री वशीकरण मंत्र – इस मंत्र को पहले इक्कतीस हजार बार जाप करके सिद्ध कर ले | इसके जाप का समय प्रातः काल एवं एक सौ आठ मंत्र का जाप प्रत्येक दिन करना आवश्यक है | मंत्र को सिद्ध हो जाने के पश्चात चावल या पुष्प को एक सौ आठ बार अभिमंत्रित कर जिस भी स्त्री , महिला , या लड़की के सर पर गिराएंगे वह वश में हो जायेगी | मंत्र में अमुक के स्थान पर उस स्त्री का नाम लेना चाहिए जिसे आप अपने वश में करना चाहते है | मंत्र – OM NAMO ARHANTANAM ARE ARINI , MOHINI AMUKAM MOHAY MOHAY SWAHA ||